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Thursday, March 03, 2022

झूठ | Hindi Poetry On Immaturity | फितरत

फितरत







और कितना झूठ है सच में तेरे

फितरत तो तेरी जान ली यार हमने

क्या कहे तुझको ?

तू तो अपनी समझदारी में है !

खो दिया है सबकुछ 

फिर भी होशियारी में है !!


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Radhe krishna

  एक दूसरे के प्रति सेवा भाव ,आदर सत्कार  और प्रेम में ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है l