दस्तक दरवाजे पे देता है कोई
चलते हुए जो रोक लेती .... ऐसी यादों से मिलाता है कोई भूलें भी तो भूल न पाए ऐसी अहमियत रखता है कोई दस्तक दरवाजे पे देता है कोई पुरानी कहानियों को पढ़ता है कोई कुछ ना कहके.. सबकुछ कह दे ऐसी शख्सियत रखता है कोई आज भी है और कल भी रहेगा इतना प्यार जताता है कोई आँखों में जिसका अक्स दिखे ऐसी नसीबियत रखता है कोई मेरे आज को मेरे कल से मिलाता है कोई खुद से जादा विश्वास करता है कोई मन्नत के धागे बाँधता है कोई फर्क़ जिसपे ता उम्र रहेगा ऐसी वसीयत रखता है कोई