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कर्मों का खेल, महादेव शायरी, अहंकार कपट और ईश्वर

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वो अपने वहम को सच मान बैठे सोने की काया को पत्थर कर बैठे अपने अहंकार में गिर गये इतना माथे के चन्दन को खुद रौंध बैठे l l अंतर आइना देखते तो सच जान जाते कभी तो रूप को अपनी पहचान जाते  है कपट, स्वार्थ और छलावा दिखावा  ना जाने कैसे ईश्वर से नज़रे मिलाते l l कैसा ये भ्रम है,  कैसी ये भ्रांति सोने के हिरण ने सीता मैया भरमा दी  मैं ही मैं हूं सर्वोत्तम और श्रेष्ठ इसी सोच ने रावण की हस्ती मिटा दी l l असल में खेल है कर्मों का सारा जो दिया तूने वही पलट के आया दुबारा l l हर चाल तेरी उसको पता है  है आंखें बंद पर सब देखता है  तुझे तुझसे ज़्यादा वो पहचानता है  हक़ीक़त को तेरी वो जनता है  l l वो ऊपर बैठा ईश्वर है सभी का जान के भी अंजान रचियता जगत का  तेरे दाऊ पेच सब उसकी नज़र है उसके हाथ में ही कर्मो की कलम  है l l टेढ़ी चाल को भी जो सीधी कर दे  पल में प्रलय को भी शांत करदे कृपा उसकी ऐसी के दिशा बदल दे   l l लिखु कुछ भी मैं महादेव मेरे शब्दों में मेरे अपना आशीर्वाद दे दे l l

MOTIVATINAL & Inspirational Hindi Poetry, निरंतर प्रयास ही सफलता की सीडी है

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नियति तेरी किताब में पक्षपात नहीं है, जो फिर दोहराया जाए इतिहास वही है। मेहनत करो, उसका कोई अंत नहीं है,  फल मिलेगा ज़रूर, अगर दिशा सही है। रंग रूप जाति भेद तुच्छ बातें हैं,  ज्ञान के प्रकाश की लौ ही श्रेष्ठ है। निरंतर प्रयास ही कामयाबी की सीढ़ी है, जो इस पर चढ़ गया, उसकी जीत हुई है। गिर-गिर के सीखना रास्ता आसान कर रहा , दुख में भी सुख है, इसका आभास कर रहा । शिक्षा के सितारे आँखों में चमक रहे, कल कागज़ पे उतरेंगे, इसका गुमान कर रहे। अध्ययन एक आज़ादी जो सोच बदल रहा , गाँव-कस्बे से उठकर युवा आगे बढ़ रहा । प्रतिस्पर्धा है चारों ओर, आगे बढ़ने की होड़ है, डूबा है जो ज्ञान रूपी सागर में,  अमृत का कलश उसकी गोद है।

Old Memories With Passing Life, एक मोड़ पे जिंदगी

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ठहर सी गई है  एक मोड़ पे जिंदगी  चल रही है धीमी चाल उफ ये जिंदगी  बादलों ने जैसे  आवारापन खो दिया  बरस रही है घटा बनके  ये जिंदगी  !! बीती बातें किवाडी को  खटखटाने लगी  किताबें भी गुज़रा समय  दिखाने लगी पन्नों को पलटते रहे  और दिल कहने लगा  देखते ही देखते गुजार गई ये जिंदगी 

Value & Respect Yourself First

किसी को अपनी भी खबर न रहे  कोई ऐसे भी बेख़बर न रहे  लुटा के दिल की दौलत गैरों पे हाथ अपने कभी खाली न रहे  मसरूफ इतना न रहे खिदमत में  के सर्दी, गर्मी बरसात  एक जैसे लगे  संवारते हर दम न रहे  भूल के खुदको  के आईना भी कहने लगे  अब देख लो मुझको  जिंदगी कहती है  कुछ होश है तुमको  बीत रही है जो  वापस ला सकते हो उसको ? हर कदम एक शोर होता रहे  ना हो ऐसा के गुरूर टूटता रहे  ओझह ऐसी ना हो के दोस्त मेरे  कोई अपना, अपनी नजर से गिरता रहे 

काट रहे प्रारब्ध तमाम, बंध के रहना ना कोई प्रीत है

किनारे की एक आस है  नदिया की भी प्यास है  मंझधार की पुकार है  रेत का भी संसार है  ख़ाहिश हर किसी की है  बंध के रहना न कोई रीत है  जगत को जो चला रही  विश्वास की एक प्रीत है  कल कल करके बह रही  संदेश नदिया  दे रही  अग्रसर अपने पथ पर  निरंतर बह रही  चाँद की चाँदनी  बतला रही  मार्ग रोशन हर किसी का कर रही  पूजा-पाठ तीर्थ धाम  मन को देते आराम  नाम जप भगवान का नाम  बना रहे सबके बिगड़े काम  दान पुण्य और सेवा भाव  काट रहे प्रारब्ध तमाम  कन्या पूजन, महिला का सम्मान  खोल रहा है सोते भाग कर्म किया जा अपना बन्दे  हो जाएगा जीना असान 

चाँद धरती की बाहों में समा जाए

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काश ये चाँद और करीब आ जाए  कुछ पल के लिए चाँदनी सीने में उतर जाए  लगा लू एक बार गले और तसल्ली हो जाए  कभी तो चाँद धरती की बाहों में समा जाए